ENT · September 14, 2026 · 9 min read
कान में मैल (Earwax) जमना: लक्षण, घरेलू गलतियाँ और सुरक्षित सफाई के तरीके
By Dr. Sangeeta Sengar

Key takeaways
- कान में मैल (Earwax/Cerumen) एक प्राकृतिक सुरक्षा परत है जो धूल और बैक्टीरिया को कान के पर्दे तक जाने से रोकती है।
- कॉटन बड्स (Earbuds), चाबी, सेफ्टी पिन या माचिस की तीली का इस्तेमाल कान के पर्दे को फाड़ सकता है।
- कान में सरसों का तेल या गर्म तेल डालने से फंगल इन्फेक्शन (Otomycosis) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
- मेडी हेल्प हॉस्पिटल कानपुर में डॉ. संगीता सेंगर द्वारा आधुनिक माइक्रो-सक्शन (Micro-suction) तकनीक से दर्द रहित सफाई उपलब्ध है।
कान में भारीपन महसूस होना, खुजली होना, कम सुनाई देना या कान में कुछ अटका हुआ सा लगना—यह शिकायत लेकर रोजाना कई मरीज कानपुर में ईएनटी क्लिनिक पहुंचते हैं। बहुत से घरों में कान में मैल दिखने पर लोग तुरंत कॉटन बड्स (Earbuds), हेयरपिन या माचिस की तीली कान में डालकर घुमाने लगते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आदत आपके कान के नाजुक पर्दे को हमेशा के लिए नुकसान पहुंचा सकती है?
डॉ. संगीता सेंगर (वरिष्ठ ENT सर्जन, मेडी हेल्प हॉस्पिटल कानपुर) के अनुसार, कान में बनने वाला मैल (Earwax या Cerumen) कोई गंदगी नहीं है, बल्कि यह कान की सुरक्षा के लिए कुदरत का बनाया हुआ एक सुरक्षा कवच है। जब यह मैल बहुत ज्यादा मात्रा में बनकर सूख जाता है और कान की नली को पूरी तरह बंद कर देता है, तब इसे इम्पैक्टेड वैक्स (Impacted Cerumen) कहा जाता है।
कान में मैल (Earwax) क्यों बनता है?
हमारे कान की बाहरी नली में मौजूद विशेष ग्रंथियां एक मोम जैसा चिपचिपा पदार्थ बनाती हैं। इसके मुख्य काम हैं:
- धूल और कीटाणुओं से बचाव: हवा में उड़ती धूल, मिट्टी और बैक्टीरिया को कान के पर्दे तक पहुंचने से रोकना।
- नमी बनाए रखना: कान की नाजुक त्वचा को रूखा होने और खुजली से बचाना।
- प्राकृतिक सफाई (Self-Cleaning): जब हम बोलते या चबाते हैं, तो जबड़े की गति से पुराना वैक्स धीरे-धीरे अपने आप बाहर की तरफ खिसक जाता है।
कान में वैक्स जमने (Ear Blockage) के प्रमुख लक्षण
यदि आपके कान में बहुत अधिक मैल जम गया है, तो आपको निम्नलिखित लक्षण महसूस हो सकते हैं:
- कान में लगातार भारीपन या बंद होने का अहसास।
- अचानक या धीरे-धीरे कम सुनाई देना (विशेषकर नहाने के बाद जब वैक्स पानी सोखकर फूल जाता है)।
- कान में हल्की खुजली या कभी-कभी मीठा-मीठा दर्द।
- कान में सनसनाहट या सीटी जैसी आवाज (Tinnitus)।
- गंभीर मामलों में सिर चकराना या असंतुलन महसूस होना।
खतरनाक घरेलू गलतियाँ जिनसे आपको बचना चाहिए
- कॉटन बड्स (Earbuds) का इस्तेमाल: कॉटन बड से मैल बाहर आने के बजाय और अंदर धकेला जाता है, जिससे वह कान के पर्दे से चिपक जाता है। कई बार रुई कान के अंदर ही छूट जाती है।
- सरसों या लहसुन का तेल डालना: कान में कच्चा तेल डालने से फंगस तेजी से पनपती है, जिससे तेज दर्द, मवाद और सूजन आ जाती है।
- तीली या सेफ्टी पिन डालना: इससे कान की नली में घाव हो सकता है और पर्दा फटने का सीधा जोखिम रहता है।
कान की सुरक्षित सफाई: आधुनिक ENT उपचार
कानपुर में मेडी हेल्प हॉस्पिटल में डॉ. संगीता सेंगर द्वारा बिना किसी दर्द या जोखिम के कान की सुरक्षित जांच और सफाई की जाती है:
1. ऑटोमाइक्रोस्कोपी (Otomicroscopy)
हाई-डेफिनिशन माइक्रोस्कोप के जरिए कान के अंदरूनी हिस्से और पर्दे की स्थिति को बारीकी से देखा जाता है कि पर्दा सुरक्षित है या नहीं।
2. वैक्स सॉफ्टनिंग ईयर ड्रॉप्स (Wax Softening Drops)
सख्त हो चुके वैक्स को पहले 2-3 दिन विशेष ड्रॉप्स डालकर मुलायम किया जाता है ताकि सफाई के दौरान बिल्कुल दर्द न हो।
3. माइक्रो-सक्शन (Micro-suction Technique)
यह दुनिया भर में सबसे सुरक्षित और आधुनिक तरीका है। इसमें एक पतले सक्शन पाइप के जरिए वैक्स को धीरे से बाहर खींच लिया जाता है। इसमें पानी डालने की जरूरत नहीं पड़ती और पर्दा पूरी तरह सुरक्षित रहता है।
डॉ. संगीता सेंगर के बारे में
डॉ. संगीता सेंगर (MBBS, MS - ENT) कानपुर की प्रतिष्ठित ईएनटी विशेषज्ञ और माइक्रो-ईयर सर्जन हैं, जिनके पास 12+ वर्षों का क्लिनिकल व सर्जिकल अनुभव है। वे मेडी हेल्प हॉस्पिटल, सर्वोदय नगर, कानपुर में अपनी सेवाएं देती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: क्या मुझे रोज कान साफ करने चाहिए?
नहीं, सामान्य स्थिति में कान खुद ब खुद अपनी सफाई करता है। केवल नहाने के बाद तौलिए से कान का बाहरी हिस्सा पोंछना काफी है। अंदर कुछ भी न डालें।
Q2: क्या कान में तेल डालना सुरक्षित है?
बिल्कुल नहीं। तेल डालने से फंगल इन्फेक्शन होता है और यदि पर्दे में कोई छोटा छेद हो तो तेल अंदर जाकर गंभीर संक्रमण पैदा कर सकता है।
Q3: कान की माइक्रो-सक्शन सफाई में कितना समय लगता है?
यह एक ओपीडी प्रोसीजर है जिसमें मात्र 5 से 10 मिनट का समय लगता है और मरीज तुरंत अपने काम पर लौट सकता है।
