ENT · September 14, 2026 · 11 min read
चक्कर आना और सिर घूमना (Vertigo/BPPV): क्या इसका कारण कान की समस्या है?
By Dr. Sangeeta Sengar

Key takeaways
- 80% से अधिक चक्कर आने के मामलों की मुख्य वजह अंदरूनी कान (Inner Ear) में संतुलन प्रणाली का बिगड़ना होता है।
- BPPV में सिर हिलाने या करवट बदलने पर 30 सेकंड से 1 मिनट तक सब कुछ तेजी से घूमता हुआ लगता है।
- चक्कर आने को सिर्फ कमजोरी या गैस समझकर नजरअंदाज करना बीमारी को बढ़ा सकता है।
- एप्ले मैनूवर (Epley Maneuver) और ईएनटी रिपोजिशनिंग से 95% से अधिक मरीज तुरंत ठीक हो जाते हैं।
क्या सुबह सोकर उठते ही, करवट बदलते ही या नीचे झुकने पर आपको ऐसा लगता है जैसे पूरा कमरा, पंखा और दीवारें गोल-गोल घूम रही हैं? चक्कर के साथ उल्टी या जी मिचलाने जैसा महसूस होना बहुत डरावना अनुभव हो सकता है। अधिकांश लोग इसे कमजोरी, डिहाइड्रेशन या गैस की समस्या मानकर घरेलू नुस्खे आजमाने लगते हैं। लेकिन मेडिकल साइंस के अनुसार, 80% से अधिक चक्कर आने की असली वजह अंदरूनी कान (Inner Ear) की खराबी होती है।
इसे मेडिकल भाषा में वर्टिगो (Vertigo) कहा जाता है। डॉ. संगीता सेंगर (वरिष्ठ ईएनटी एवं न्यूरो-ओटोलॉजिस्ट, मेडी हेल्प हॉस्पिटल कानपुर) के अनुसार, कान का काम सिर्फ सुनना ही नहीं, बल्कि शरीर का गुरुत्वाकर्षण संतुलन (Body Balance) बनाए रखना भी होता है।
कान और चक्कर आने का क्या संबंध है?
हमारे अंदरूनी कान में वेस्टिबुलर सिस्टम (Vestibular System) होता है, जिसमें तरल पदार्थ और सूक्ष्म कैल्शियम क्रिस्टल्स (Otoliths) होते हैं। जब भी हम सिर हिलाते हैं, ये क्रिस्टल दिमाग को सिग्नल भेजते हैं कि शरीर किस दिशा में है। जब इन क्रिस्टल्स या तरल पदार्थ में असंतुलन होता है, तो दिमाग को गलत संकेत जाते हैं और भयानक चक्कर आने लगते हैं।
ईएनटी से जुड़े वर्टिगो के मुख्य प्रकार
1. BPPV (Benign Paroxysmal Positional Vertigo)
यह सबसे सामान्य प्रकार है। इसमें कान के कैल्शियम क्रिस्टल अपनी जगह से फिसलकर सेमी-सर्कुलर कैनाल में चले जाते हैं। करवट बदलते ही या ऊपर-नीचे देखने पर तेज चक्कर आता है जो 30 सेकंड से 1 मिनट तक रहता है।
2. मेनियर डिजीज (Meniere's Disease)
अंदरूनी कान में तरल पदार्थ का दबाव बढ़ जाने से चक्कर, कान में भारीपन, सीटी की आवाज (Tinnitus) और कम सुनाई देने की समस्या होती है।
3. वेस्टिबुलर न्यूराइटिस / लैबिरिंथाइटिस (Vestibular Neuritis)
वायरल संक्रमण के कारण संतुलन वाली नस में सूजन आ जाती है, जिससे लगातार कई दिनों तक गंभीर चक्कर और उल्टी होती है।
वर्टिगो का सटीक इलाज कैसे होता है?
मेडी हेल्प हॉस्पिटल कानपुर में डॉ. संगीता सेंगर द्वारा बिना किसी जटिलता के वर्टिगो का आधुनिक उपचार किया जाता है:
1. पोजीशनिंग मैनूवर (Epley & Semont Maneuver)
BPPV के मरीजों के लिए यह एक जादुई इलाज साबित होता है। इसमें डॉक्टर मरीज के सिर को विशेष कोणों पर घुमाकर भटके हुए क्रिस्टल्स को वापस उनकी सही जगह पर पहुंचा देते हैं। इसके बाद मरीज को तुरंत चक्कर आने बंद हो जाते हैं।
2. वेस्टिबुलर सप्रेसेंट और एंटी-वर्टिगो दवाएं
शुरुआती तीव्र चक्कर और उल्टी को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षित दवाएं दी जाती हैं।
3. वेस्टिबुलर रिहैबिलिटेशन थेरेपी (VRT)
आंखों और सिर के विशेष व्यायामों के जरिए दिमाग और कान के संतुलन को दोबारा मजबूत बनाया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: चक्कर आने पर तुरंत क्या करना चाहिए?
तुरंत किसी सुरक्षित जगह बैठ जाएं या लेट जाएं, अचानक सिर न हिलाएं, तेज रोशनी से बचें और पानी पिएं। स्थिति संभलने पर ईएनटी डॉक्टर को दिखाएं।
Q2: क्या वर्टिगो के लिए हमेशा एमआरआई (MRI) जरूरी है?
अधिकांश BPPV मामलों में क्लिनिकल ईएनटी जांच और मैनूवर से ही निदान हो जाता है। न्यूरोलॉजिकल लक्षण होने पर ही एमआरआई की सलाह दी जाती है।
