All articles

ENT · September 14, 2026 · 10 min read

टॉन्सिल्स का बढ़ना और दर्द (Tonsillitis): बच्चों और बड़ों में लक्षण, घरेलू देखभाल और सर्जरी

By Dr. Sangeeta Sengar

Tonsillitis and throat examination by Dr. Sangeeta Sengar Kanpur

Key takeaways

  • टॉन्सिल्स हमारे गले के दोनों तरफ स्थित लिम्फ नोड्स हैं जो मुंह के रास्ते आने वाले बैक्टीरिया से लड़ते हैं।
  • इन्फेक्शन होने पर टॉन्सिल्स लाल, सूजे हुए और मवाद (Pus spots) से भर जाते हैं, जिससे खाना निगलना मुश्किल हो जाता है।
  • बच्चों में टॉन्सिल्स और एडेनोइड्स बढ़ने से मुंह खोलकर सोना, खर्राटे और कान में बार-बार इन्फेक्शन होता है।
  • मेडी हेल्प हॉस्पिटल में आधुनिक कोबलेशन (Coblation) तकनीक से दर्द रहित और सुरक्षित टॉन्सिल सर्जरी की जाती है।

पानी का एक घूंट निगलते ही गले में कांटे चुभने जैसा भयानक दर्द, तेज बुखार और जबड़े के नीचे गिल्टियों में सूजन—ये टॉन्सिलाइटिस (Tonsillitis / टॉन्सिल्स का इन्फेक्शन) के चिरपरिचित लक्षण हैं। टॉन्सिल्स की समस्या बच्चों में सबसे ज्यादा देखी जाती है, लेकिन यह किसी भी उम्र के वयस्क को प्रभावित कर सकती है।

डॉ. संगीता सेंगर (वरिष्ठ ईएनटी सर्जन, मेडी हेल्प हॉस्पिटल कानपुर) बताती हैं कि टॉन्सिल्स हमारे शरीर की रक्षा प्रणाली का पहला सिपाही होते हैं। लेकिन जब बार-बार होने वाले संक्रमण से टॉन्सिल्स खुद बीमारियों का घर बन जाते हैं, तो वे शरीर के लिए नुकसानदेह साबित होने लगते हैं।

टॉन्सिलाइटिस के मुख्य लक्षण

  • गले में अत्यधिक दर्द जो कान तक पहुंचता है।
  • खाना, पानी या थूक निगलने में तेज तकलीफ (Dysphagia)।
  • टॉन्सिल्स का लाल होकर सूज जाना और उन पर सफेद या पीले रंग के मवाद के चकत्ते (Pus Spots) दिखना।
  • तेज बुखार और ठंड लगना।
  • मुंह से बदबू आना (Halitosis) और आवाज में भारीपन (Hot potato voice)।
  • बच्चों में भूख न लगना, चिड़चिड़ापन और लार टपकना।

बच्चों में एडेनोइड्स (Adenoids) की समस्या

टॉन्सिल्स की तरह ही नाक के पीछे एडेनोइड्स ग्रंथियां होती हैं। जब ये ग्रंथियां सूजकर बड़ी हो जाती हैं, तो बच्चा नाक से सांस नहीं ले पाता। इसके मुख्य लक्षण हैं: मुंह खोलकर सोना, रात में खर्राटे लेना, नाक से आवाज आना और कान में पानी/मवाद जमा होना।

टॉन्सिल की सुरक्षित देखभाल और घरेलू उपाय

  1. गुनगुने नमक के पानी से गरारे: दिन में 3-4 बार नमक के पानी से गरारे करने से गले की सूजन और दर्द में तुरंत राहत मिलती है।
  2. भरपूर तरल पदार्थ: सूप, गुनगुना पानी और शहद-अदरक का सेवन करें। बहुत ठंडा पानी या कोल्ड ड्रिंक बिल्कुल न पिएं।
  3. एंटीबायोटिक का पूरा कोर्स: यदि डॉक्टर ने बैक्टीरियल इन्फेक्शन के लिए एंटीबायोटिक लिखी है, तो उसका पूरा कोर्स करें। बीच में दवा न छोड़ें।

टॉन्सिल सर्जरी (Tonsillectomy) कब जरूरी होती है?

हर टॉन्सिल में सर्जरी की जरूरत नहीं होती। मेडिकल गाइडलाइन्स के अनुसार टॉन्सिल निकालने की सलाह तभी दी जाती है जब:

  • मरीज को साल में 5 से 7 बार से ज्यादा गंभीर टॉन्सिलाइटिस का अटैक आता हो।
  • टॉन्सिल्स इतने बड़े हो गए हों कि सांस लेने में रुकावट और स्लीप एप्निया पैदा कर रहे हों।
  • टॉन्सिल के चारों तरफ मवाद की गांठ (Quinsy / Peritonsillar Abscess) बन गई हो।

आधुनिक कोबलेशन टॉन्सिलेक्टोमी (Coblation Tonsillectomy)

मेडी हेल्प हॉस्पिटल कानपुर में डॉ. संगीता सेंगर द्वारा एडवांस कोबलेशन तकनीक से सर्जरी की जाती है। इसमें अत्यधिक कम तापमान (Low Heat) पर काम होता है, जिससे पारंपरिक सर्जरी की तुलना में रक्तस्राव न के बराबर होता है, दर्द बहुत कम होता है और बच्चा 24-48 घंटे में सामान्य भोजन खाने लगता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: क्या टॉन्सिल निकलवाने से बच्चे की इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है?
बिल्कुल नहीं। शरीर में संक्रमण से लड़ने के लिए सैकड़ों अन्य लिम्फ नोड्स होते हैं। बार-बार संक्रमित टॉन्सिल निकालने से बच्चे का बार-बार बीमार पड़ना बंद होता है और उसका शारीरिक विकास बेहतर होता है।

Q2: क्या टॉन्सिल सर्जरी के बाद तुरंत आइसक्रीम खा सकते हैं?
हाँ, सर्जरी के बाद ठंडी चीजें (जैसे वैनिला आइसक्रीम) खाने से गले की रक्त वाहिकाएं सिकुड़ती हैं और दर्द में आराम मिलता है।